🎬 सैयारा मूवी रिव्यू: एक अधूरी मोहब्बत और संगीत की पूरी कहानी
कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ देखने के लिए नहीं होतीं, बल्कि महसूस करने के लिए होती हैं। Saiyaara Movie Review Hindi देखने के बाद मुझे भी कुछ ऐसा ही लगा। ये फिल्म उन लोगों के लिए है जिन्होंने प्यार किया है, दिल टूटा है और फिर किसी अपने से बिछड़ जाने का दर्द सहा है। मैं खुद ऐसी फिल्मों को देखकर थोड़ी देर के लिए अपनी दुनिया से कट जाता हूं – और यही बात इस फिल्म को खास बनाती है।
💔 कहानी जो दिल से जुड़ती है
फिल्म की शुरुआत वाणी बत्रा से होती है, जिसकी सगाई टूट चुकी है। उसका चेहरा देखकर ही लग जाता है कि वह अंदर से कितना टूटा हुआ है। मैंने अपनी एक दोस्त को देखा था, जो रिलेशनशिप खत्म होने के बाद खुद को संभालने के लिए नौकरी में डूब गई थी। वाणी की कहानी उससे मिलती-जुलती लगी – एक लड़की जो अपने दर्द को शब्दों में छिपा रही है।
इसी ऑफिस में एंट्री होती है कृष कपूर की। शुरुआत में वह थोड़ा अजीब लगता है – जैसे उसे किसी की परवाह नहीं। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उसकी असलियत सामने आने लगती है। वह असल में एक सिंगर है, और उसके दिल में भी बहुत कुछ चल रहा है। मुझे ये बात अच्छी लगी कि कहानी में दोनों ही किरदारों की गहराई को दिखाया गया है।
🎵 म्यूजिक जो सीधा दिल में उतरता है
फिल्म का संगीत इसकी सबसे मजबूत चीज़ है। जब भी कोई सीन थोड़ा हल्का लगता है, म्यूजिक उसे थाम लेता है। खासकर टाइटल ट्रैक “सैयारा”, जो फिल्म खत्म होने के बाद भी मेरे कानों में बजता रहा। मुझे ऐसा लगा जैसे ये गाना मेरे लिए ही लिखा गया है।
कभी-कभी हम किसी गाने को पहली बार में ही महसूस कर लेते हैं। यही इस फिल्म के म्यूजिक की खास बात है – वो सिर्फ सुनाई नहीं देता, महसूस होता है। अगर आप भी म्यूजिक को दिल से सुनते हैं, तो ये गाने जरूर आपको छू जाएंगे।
🎭 अभिनय जो उम्मीद से बेहतर है
इस फिल्म से अहान पांडे और अनीत जैसे नए चेहरे सामने आए हैं। शुरू में मुझे लगा कि शायद ये सिर्फ “फिल्मी परिवार” से हैं, लेकिन जब एक्टिंग देखी, तो लगा कि मेहनत की है।
अहान का किरदार पहले थोड़ा झटका देता है – बिंदास और थोड़ा ओवरएक्टिंग वाला लगता है। लेकिन धीरे-धीरे जब उसकी इमोशनल साइड दिखती है, तब लगने लगता है कि हां, इस लड़के में कुछ बात है। वहीं अनीत का रोल बहुत नैचुरल लगा – जैसे वो कोई एक्ट्रेस नहीं, बल्कि वाणी ही हो।
मैंने कई बार फिल्मों में देखा है कि नए चेहरे बस डायलॉग बोलते हैं, महसूस नहीं करते। लेकिन इस फिल्म में ऐसा नहीं लगा – दोनों ने अपने-अपने हिस्से अच्छे से निभाए हैं।
📽️ स्क्रीनप्ले, कैमरा और कमजोर पहलू
हर फिल्म में कुछ अच्छी चीज़ें होती हैं और कुछ कमज़ोरियां भी। सैयारा का पहला हिस्सा काफी बढ़िया है – कहानी जल्दी पकड़ लेती है और आगे क्या होगा, ये जानने का मन करता है।
लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म थोड़ी धीमी लगने लगती है। मुझे लगा जैसे मेकर्स थोड़े कन्फ्यूज हो गए कि अब कहानी को कहां ले जाएं। क्लाइमैक्स भी जल्दी-जल्दी खत्म कर दिया गया। सपोर्टिंग कास्ट को थोड़ा और मौका मिलता, तो फिल्म और मजबूत हो सकती थी।
हाँ, cinematography बहुत सुंदर है। कुछ सीन इतने प्यारे लगे कि लग रहा था जैसे कोई कविता चल रही हो स्क्रीन पर।
✅ क्या आपको ये फिल्म देखनी चाहिए?
अब बात करते हैं असली सवाल की – क्या सैयारा देखने लायक है?
हां, अगर:
- आपको इमोशनल कहानियां पसंद हैं
- म्यूजिक आपकी कमजोरी है
- आप नए एक्टर्स का काम खुले दिल से देख सकते हैं
शायद नहीं, अगर:
- आप बहुत तेज़-तर्रार या थ्रिलर स्टोरी के फैन हैं
- आप कुछ बिल्कुल नया देखने की उम्मीद में हैं
मेरे हिसाब से, सैयारा एक ऐसी फिल्म है जो दिल को छूती है। कुछ पलों में खुद की परछाईं दिख जाती है। हर किसी की लाइफ में कोई अधूरी कहानी होती है – ये फिल्म शायद आपको उस कहानी से जोड़ दे।